google-site-verification=OrvyYHNpisAswr3Idvj9dHHFWBmG8fiBDQ5zN3jFpNQ रक्षा बंधन भगवान बलि राज की कहानी -
रक्षा बंधन बलि राज की कहानी:

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रक्षा बंधन बलि राज की कहानी

प्राचीन काल में, आयोध्या नगर में एक महान राजा बलि नामक राजा शासन करते थे। वह राजा न केवल बड़े धनी और योग्य प्रशासक थे, बल्कि उनकी धार्मिकता और दया की भावना भी उन्हें विशेष बनाती थी।

 

बलि राज का चारों ओर प्यार और सम्मान था  उनके नागरिक उन्हें एक उदार राजा के रूप में पूजते थे। वे न केवल अपने राज्य की सुरक्षा बढ़ाने में व्यस्त रहते थे, बल्कि उन्होंने धर्म के प्रति भी बहुत गहरा आदर रखा।

 

एक दिन, बलि राज की राजमहल में एक बड़ी समिति आयो

जित हुई, जिसमें विद्वान्, धार्मिक गुरुओं, और नागरिकों ने भाग लिया। इस समिति में बहुत सारे मुद्दे चर्चा के लिए प्रस्तुत किए गए, लेकिन एक मुद्दा बीच में फंस गया। वह मुद्दा था कि कैसे और कब लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया जाए।

 

उस समय, राजा बलि ने एक योग्य और ज्ञानी गुरु को आग्रहित किया और उन्हें पूछा कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान क्या हो सकता है। गुरु ने उन्हें एक श्रेष्ठ उपाय बताया – रक्षा बंधन का त्योहार।

 

गुरु ने बताया कि रक्षा बंधन के दिन, बड़े भाई अपनी छोटी बहनों को राखी बांधते हैं और उनकी रक्षा करने का वादा करते हैं। यह संकेत होता है कि बड़े भाई अपनी छोटी बहनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सजाग रहें और उनकी सहायता करें।

 

राजा बालि ने गुरु की सलाह मानते हुए रक्षा बंधन का पालन करने का निश्चय किया और उन्होंने अपनी छोटी बहन को खास राखी बांधी।

 

इस तरीके से, भगवान बलि ने रक्षा बंधन के माध्यम से अपने राज्यवासियों को धर्म और मानवीय मूल्यों की महत्वपूर्णता का संदेश दिया। इस प्रकार, रक्षा बंधन का यह महत्वपूर्ण त्योहार भगवान बलि की महानता और धार्मिक भावनाओं का प्रतीक बन गया।

By नवीन

मै नवीन राई हिंदी ब्लॉग साइट न्यूज़दुनिया11 मे आपका स्वागत करता हु।

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